बुधवार, 11 मार्च 2015

व्यथित हृदय अब रोता है!

व्यथित हृदय अब रोता है!

लोकतंत्र  दे रहा दुहाई,
व्यथित हृदय अब रोता है|
आतंकभ्रष्टाचार देख
भारत सिसकी लेता है
बलिदानों की वेदी पर 
नराधम स्वप्न मजे के लेता है

श्वेतों से पा आजादी
श्याम वही सब करते हैं
नैतिकता कूच कर गई 
भ्रष्ट नेता आज पनपे हैं 
सिसकी लेती भारत माता 
उलूक खद्दर में लिपटे हैं|

जवान बलि देते सीमा पर 
वाणी हैन उनकी  विराम पाती
पूछोउन परिवारी जन से 
जिनका खोया कुल-थाती |
पेट काट परायाअपना भरते
हक छीनसमता की बातें करते
स्वार्थ-निमग्न वह सोता है
व्यथित हृदय अब रोता है!

           -डॉ. वी. के. पाठक
            

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